स्वामी जी का चमत्कार: पानी बन गया दूध

दिसंबर 1990 की बात है स्वामी जी यज्ञ कराने के उद्देश्य से सथिनी ( रीवा ) आए लेकिन वहा के तीन महात्माओं (स्वामी श्रीधराचार्य जी, राममिलन दास त्यागी जी महाराज और राम नारायणाचार्य जी) ने उनका विरोध किया। इससे क्रोधित हो स्वामी जी हठ योग करने लगे और भारी ठंड में पकरियार नदी में पद्मासन लगा कर बैठ गए । 21 दिनों तक वे वैसे ही नदी बैठे रहे जिससे भयभीत होकर वे तीनों महात्मा जो उनका विरोध कर रहे थे वहा से भाग गए। जब वे वहा से भाग गए तो स्वामी जी ने यज्ञ आरंभ किया लेकिन स्थानीय लोग जो उन तीनो महात्माओं की शिष्य परंपरा से थे उन्होंने यज्ञ हेतु दूध देने से मना कर दिया।तब स्वामी जी के आदेश पर उनके एक आचार्य नदी से एक बाल्टी ( लगभग 10 लीटर) में जल लेकर आए जो देखते ही देखते दूध में परिवर्तित हो गया। ये देखकर सभी अचंभित रह गए और फिर वहां गांव वालो की भीड़ एकत्रित होने लगी। गांव वालो ने स्वामी जी से क्षमा याचना की जिसपर स्वामी जी ने उन्हे प्रायश्चित करने को कहा। गांव वालो ने जब प्रायश्चित का मार्ग पूंछा तो स्वामी जी ने कौवों को भोजन करने के लिए कहा। तब गांव वालो ने पूछा निमंत्रण योग्य कौवे आयेगे कहा से? स्वामी जी ने कहा आप उच्च स्वर में निमंत्रण दे भोजन का और भोजन का प्रबंध करे। गांव वालो ने वैसा ही किया और निमंत्रण पर लगभग 50 हजार कौवे वहा आए और भोजन किया। ये देख गांव वाले स्तब्ध रह गए।

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