
1986 की बात है जब स्वामी जी विद्यार्थी जीवन में थे तब वे प्रयागराज के सिरसा में गंगा जी के किनारे नाव पर सोया करते थे। एक दिन प्रातः समय किसी ने नाव को लंगर से खोल दिया और उसी समय अचानक बाढ़ आई पर स्वामी जी नाव पर सोए रहे। नौका से 2 किलोमीटर दूर गंगा जी और तमस का संगम था और उससे 2 किलोमीटर दूर भवर जाल। स्वामी जी की नौका बहते बहते भवर जाल तक पहुंच गई। ये देख वहा के सुरक्षा कर्मियों ने स्टीमर भेजा और स्थानीय मछुआरे भी सहायता हेतु अग्रसर हुए। किंतु तभी स्वामी जी जाग गए। वे नौका से नीचे उतरे और जल में खड़े हो गए। सभी ये देख अचंभित हो गए की जल स्वामी जी के घुटने तक था। तब से उन्हे उस क्षेत्र में नौका वाले बाबा और नैया वाले बाबा के नाम से जाना जाने लगा।