
गाड़ा ( सीधी ) के एक डॉक्टर जो स्वामी जी के शिष्य थे स्वामी जी के साथ जबलपुर से सीधी आ रहे थे तभी डॉक्टर साहब के पास एक फोन आया जो उनके ड्राइवर का था जो गोविंदगढ़ के पहाड़ पर फसा हुआ था क्योंकि गाड़ी का पेट्रोल खतम हो गया था और कोई स्थानीय सहायता इतने निर्जन स्थान पर संभव न थी। ड्राइवर ने डॉक्टर साहब से पैसे ट्रांसफर करने की मांग की पेट्रोल लेके आने के लिए। ये बात स्वामी जी ने सुनी और उन्हे ड्राइवर को पैसे ट्रांसफर करने से मना कर दिया उन्होंने कहा हम वहा पहुंचने वाले है थोड़ी प्रतीक्षा करो यदि अभी पैसे दे दिए तो ये भाग जायेगा।
जल्द ही उनकी गाड़ी उस स्थान पर पहुंच गई जहा ड्राइवर गाड़ी के साथ खड़ा था।स्वामी जी ने ड्राइवर को आदेश दिया कि गाड़ी स्टार्ट करो हम पीछे पीछे चलेंगे । बस गाड़ी कही रोकना मत। ड्राइवर ने गाड़ी शुरू की और बिना पेट्रोल की गाड़ी चल दी। लगभग 100 किलोमीटर का सफर कर जब गाड़ी सम्राट चौराहा ( सीधी ) पहुंची और वहा पहुंचकर ड्राइवर ने गाड़ी बंद की तो फिर वह दुबारा शुरू न हुई। पेट्रोल जब लाकर डाला गया तभी शुरू हुई। सभी देखकर हैरान थे कि आखिर बिना पेट्रोल के गाड़ी इतनी दूर तक कैसे चली आई…..